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Cited · Lahiri · Daily fresh

meshaमेष

Aries · 2026-05-12

आज मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का स्वराशि में भ्रमण आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को बल देता है, परंतु शनि का द्वादश भाव में स्थित होना व्यय और एकांत पर ध्यान देने का संकेत करता है।

सूर्य इस समय मेष राशि के प्रथम भाव में 27.1° पर विराजमान हैं, जो जातक को ऊर्जा, आत्मबल और व्यक्तित्व की चमक प्रदान कर सकते हैं। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार लग्नेश का लग्न में होना जातक को स्वास्थ्य, यश एवं आत्म-प्रकाश की प्राप्ति करा सकता है। आज निर्णय लेने में साहस दिखाना शुभ रह सकता है। चंद्रमा एकादश भाव में मेष से कुंभ राशि में 22.5° पर हैं, जो मित्र-मंडल, सामाजिक गतिविधियों और आय के क्षेत्र में सकारात्मक भावनाएँ ला सकते हैं। राहु भी एकादश भाव में वक्री होकर स्थित है, जिससे अप्रत्याशित लाभ या किसी नए संपर्क के माध्यम से अवसर मिल सकता है। फलदीपिका के अनुसार एकादश भाव में शुभ प्रभाव आय एवं मनोकामना की पूर्ति में सहायक हो सकते हैं। केतु पंचम भाव में सिंह राशि में वक्री है। सारावली के अनुसार पंचम भाव में केतु की स्थिति संतान-विषयक चिंता, बुद्धि में असमंजस अथवा पुराने निवेशों पर पुनर्विचार करने का संकेत दे सकती है। विद्यार्थियों को आज पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। शनि द्वादश भाव में मीन राशि में 16.1° पर हैं। लाल किताब एवं बृहत् पाराशर होरा शास्त्र दोनों के अनुसार द्वादश भाव में शनि का होना व्यय, अस्पताल या एकांत-स्थान से संबद्ध मामलों में सावधानी बरतने की आवश्यकता दर्शाता है। अनावश्यक खर्च से बचें और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें। आज रात्रि को पर्याप्त विश्राम लें।

Lucky number
1
Lucky color
सुनहरा पीला
Lucky direction
पूर्व
Auspicious
आज मित्रों से मिलना, नए सामाजिक संपर्क बनाना और सकारात्मक योजनाओं पर विचार-विमर्श करना शुभ रह सकता है।
Caution
शनि के द्वादश भाव में होने से अनावश्यक व्यय, गुप्त शत्रुओं और स्वास्थ्य संबंधी लापरवाही से बचें।

What this is based on

  • सूर्य मेष राशि के प्रथम भाव में 27.1° पर स्थित हैं।
  • चंद्रमा एकादश भाव में कुंभ राशि में 22.5° पर हैं।
  • राहु एकादश भाव में कुंभ राशि में 11.0° पर वक्री हैं।
  • केतु पंचम भाव में सिंह राशि में 11.0° पर वक्री हैं।
  • शनि द्वादश भाव में मीन राशि में 16.1° पर स्थित हैं।
Citations & engine provenance
  • लग्न में सूर्य की स्थिति जातक को ऊर्जा, आत्मबल और यश प्रदान कर सकती है।बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, भाव फल अध्याय
  • एकादश भाव में शुभ ग्रहों का प्रभाव आय एवं मनोकामना पूर्ति में सहायक हो सकता है।फलदीपिका, अध्याय 13
  • पंचम भाव में केतु की वक्री स्थिति बुद्धि में असमंजस और संतान विषयक चिंता उत्पन्न कर सकती है।सारावली, केतु फल अध्याय
  • द्वादश भाव में शनि का होना व्यय, एकांत और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता दर्शाता है।लाल किताब एवं बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, द्वादश भाव फल

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